Tuesday, April 7, 2009
पत्रकार का निंदनीय कृत्य
आज गृहमंत्री की पत्रकार वार्ता में एक पत्रकार ने जो भी किया वह निहायत ही निंदनीय है। पत्रकार का काम कलम चलाना है जूता चलाना नही। लोकतंत्र के चौथे खम्भे ने अगर न्यायपालिका का काम किया तो लोकतंत्र को मजबूत तो नही ही किया जा सकता उसे कमजोर जरूर किया जा रहा होगा। भाजपा ने आरोपी पत्रकार की भावनाओ को सही ठहराया है, कल ऐसा ही हादसा किसी मुद्दे पर उसके साथ भी तो हो सकता है, तब भावनाए सही कही जा सकेंगी? सारे देश को सभी को इसकी निंदा करनी चाहिए। रही बात भाजपा की तो उसके पास मुद्दों का अकाल है, इसलिए वो भारतीय राजनीती में ख़ुद अपने पैरों पर चलकर किनारे लगी जा रही है.
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