बीजेपी का क्या होगा ये सोच कर उस पर तरस आता है। अडवानी अभी तक वेटिंग हैं और वेटिंग ही रहने वाले हैं। एस बीच अगले लोकसभा चुनाओ के लिए नेता के रूप में मोदी का नाम आ गया। जो लोग मोदी के बारे में जानते हैं, वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे, ये सभी जानते हैं लेकिन बीजेपी के ही कई नेता ऐसा होने देंगे इसको लेकर बीजेपी ही अस्वस्त नही है। मुझे लगता है
इस बार के चुनाओ में बीजेपी की जो हालत है वो १६ मई को जब रिजल्ट आयेंगे तो सामने आ जायेगी। इस पार्टी के साथ एक दिक्कत हो तो समझ में आए उसके साथ तो नीतियों के स्तर पर संगठन के स्तर पर सभी स्तर पर दिक्कतें ही हैं। इस पार्टी में हर एक नेता pradhanmantri बनाना चाहता है, जो सम्भव नही है। दरअसल नीतिओं के मामले में कांग्रेस और बीजेपी में कोई अन्तर नही है। bas sampradayakta ke alava.
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