Sunday, April 26, 2009

अब मोदी प्रधानमंत्री

बीजेपी का क्या होगा ये सोच कर उस पर तरस आता है। अडवानी अभी तक वेटिंग हैं और वेटिंग ही रहने वाले हैं। एस बीच अगले लोकसभा चुनाओ के लिए नेता के रूप में मोदी का नाम आ गया। जो लोग मोदी के बारे में जानते हैं, वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे, ये सभी जानते हैं लेकिन बीजेपी के ही कई नेता ऐसा होने देंगे इसको लेकर बीजेपी ही अस्वस्त नही है। मुझे लगता है
इस बार के चुनाओ में बीजेपी की जो हालत है वो १६ मई को जब रिजल्ट आयेंगे तो सामने आ जायेगी। इस पार्टी के साथ एक दिक्कत हो तो समझ में आए उसके साथ तो नीतियों के स्तर पर संगठन के स्तर पर सभी स्तर पर दिक्कतें ही हैं। इस पार्टी में हर एक नेता pradhanmantri बनाना चाहता है, जो सम्भव नही है। दरअसल नीतिओं के मामले में कांग्रेस और बीजेपी में कोई अन्तर नही है। bas sampradayakta ke alava.

Tuesday, April 14, 2009

बीजेपी अध्यछ उबाच

राजनाथ सिंह का ताजा बयान पाकिस्तान पर आक्रमण करेंगे-एक गैरजिम्मेदार और बचकाना है। यूद्ध किसी समस्या का हल होता तो युद्ध समझौते पर ख़त्म क्यों होते। बीजेपी के नेताओं के रोज के बयान इस तरफ इसारा करते हैं की इन चुनाओं में बीजेपी की हालत काफी पतली है।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों में से कोई भी जनता के वास्तविक मुद्दों पर चुनाव नही चाहते वरना कमजोर प्रधानमंत्री बुढिया, गुढिया और अजीबोगरीब बातों को क्यों किया जाता। वास्तविक मुद्दे इन चुनाओं में सिर्फ वामपंथी ही उठा रहे हैं जो जनता के मुद्दे हैं। वामपन्थिओं ने सही ही नारा दिया है- जीतेगा वाम तो जीतेगा अवाम।

Sunday, April 12, 2009

मुद्दाहीन राजनीती

शायद बीजेपी और कांग्रेस के पास लोकसभा इलेक्शन में कोई मुद्दा नहीं है, अन्यथा वो बुढिया और गुडिया जैसी बातें नहीं करते। नरेन्द्र मोदी की भाषा बीजेपी की भाषा है इसीलिए तो वो बुडिया शब्द का उपयोग कर रहे है। हमारे समाज में वृद्ध तो कहा जाता है बुडिया नहीं। बीजेपी के नेता सामाजिक बोलचाल भी भूल गए। शायद इसीलिए तो गाली गलोज पर उतर आए हैं। हारने का भय ऐसा ही होता है।
बीजेपी और कांग्रेस में वृद्ध नेताओं की भरमार है, मनमोहन सिंह से लेकर आडवानी तक जवान तो कोई नहीं, फिर मोदी को ख्याल क्यों नहीं आया। इन दोनों दलों में विरासत की राजनीती करने वालों का बोलवाला है। अगर कहीं युवाओं के लिए राजनीती में स्पेस है तो वो लेफ्ट पार्टियों में है.

Tuesday, April 7, 2009

पत्रकार का निंदनीय कृत्य

आज गृहमंत्री की पत्रकार वार्ता में एक पत्रकार ने जो भी किया वह निहायत ही निंदनीय है। पत्रकार का काम कलम चलाना है जूता चलाना नही। लोकतंत्र के चौथे खम्भे ने अगर न्यायपालिका का काम किया तो लोकतंत्र को मजबूत तो नही ही किया जा सकता उसे कमजोर जरूर किया जा रहा होगा। भाजपा ने आरोपी पत्रकार की भावनाओ को सही ठहराया है, कल ऐसा ही हादसा किसी मुद्दे पर उसके साथ भी तो हो सकता है, तब भावनाए सही कही जा सकेंगी? सारे देश को सभी को इसकी निंदा करनी चाहिए। रही बात भाजपा की तो उसके पास मुद्दों का अकाल है, इसलिए वो भारतीय राजनीती में ख़ुद अपने पैरों पर चलकर किनारे लगी जा रही है.

Sunday, April 5, 2009

loksabha election

es bar ke loksabha election me abhi tak tasveer saph nahi hai, but BJP ke waiting priminister waiting hi rah jayenge, ye to pakka hai.